गीत गा रहे हैं आज हम

गीत गा रहे हैं आज हम
गीत गा रहे हैं आज हम
रागिनी को ढूँढ़ते हुए
आ गये यहाँ जवाँ कदम
मंजिलों को ढूंढते हुए ।। धृ ।।

अब दिलों में ये उमंग है
कि जहाँ नया बसायेंगे
जिंदगी का राज आज से
दोस्तों को हम सिखायेंगे
फूल हम नया खिलायेंगे
ताज़गी को ढूँढते हुए, आ गये….।।१।।

रोग की तरह दहेज है
आज देश में समाज में
है तबाह आज आदमी
लूट पर टिके समाज में
हम समाज भी बनायेंगे
मानवो को ढूँढ़ते हुए आ गये…..।।२।।

फिर ना रो सके कोई दुल्हन
जोर जुल्म का ना हो निशाँ
मुस्कुरा उठे धरा गगन
हम रचेंगे ऐसी दास्ताँ
हम वतन को यूँ सजायेंगे
रोशनी को ढूंढते हुए आ गये….।।३।।


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